कितने प्रतिशत बच्चे है ऑनलाइन पढ़ाई से खुश


काेविड-19 संक्रमण रोकने के लिए हुए लॉकडाउन में शहर के निजी स्कूलाें में करीब 73 दिनाें से ऑनलाइन क्लासेज चल रहे हैं।  शहर के स्कूलाें के स्टूडेंट्स के बीच सर्वे कर जानने की काेशिश की कि वे ऑनलाइन क्लासेज से कितने संतुष्ट हैं। अपनी संतुष्टि के अनुसार ऑनलाइन क्लासेज और रेगुलर क्लासेज काे 1-10 में से कितने मार्क्स देंगे।


सर्वे में हमने 8वीं से लेकर 12वीं तक के स्टूडेंट्स काे शामिल किया। सर्वे में 20 प्रतिशत स्टूडेंट्स ने ऑनलाइन क्लासेज काे 10 में से सिर्फ एक मार्क्स दिया, जबकि सिर्फ 13 प्रतिशत स्टूडेंट्स ने 10 मार्क्स दिए। वहीं, 42 प्रतिशत स्टूडेंट्स ने रेगुलर क्लासेज काे 10 मार्क्स दिए, जबकि 13 प्रतिशत स्टूडेंट्स ने रेगुलर क्लासेज काे भी 10 में से सिर्फ 1 मार्क्स दिया।


9 नंबर सिर्फ 4 प्रतिशत और 8 नंबर 14 प्रतिशत बच्चों ने दिए



  • कई बच्चे स्क्रीन पर सुनकर और देखकर चीजाें काे कम कनेक्ट कर पाते हैं, इनके लिए अाॅनलाइन क्लासेज अच्छा अाॅप्शन नहीं है।

  •  एनवायरमेंट, अच्छा इंटरनेट कनेक्शन, अच्छी स्क्रीन न हाेना भी पसंद-नापसंद का कारण है।

  •  ग्रुप डिस्कशन पाॅसिबल नहीं हाे पाता। ज्यादातर हाेता है कि एक व्यक्ति बाेल रहे हाेते हैं, बाकी सुनते हैं। इससे कनेक्ट नहीं होते। 

  •  कई बार ऑनलाइन क्लासेज की टाइमिंग सही न हाेना भी नापसंद करने का एक बड़ा कारण है।

  •   टेक्नाेलाॅजी फ्रेंडली न हाेना भी ऑनलाइन क्लासेज नापसंद करने का कारण है। 

  •  पढ़ाई के दाैरान हर स्टूडेंट्स टीचर का अटेंशन चाहता है, जाे ऑनलाइन में नहीं मिल पाता।



  •  क्लास रूम में एक टीचर के साथ पढ़ाई के दाैरान हाेनेवाला आइकाॅन्टैक्ट असरदार हाेता है, जाे ऑनलाइन में संभव नहीं। 

  •  ऑनलाइन क्लासेज में बहुत कम स्टूडेंट्स सेम टाइम में क्राॅस क्वेश्चन नहीं कर पाते।

  •  काेविड-19 के समय में ऑनलाइन क्लासेज एक विकल्प मात्र है, रेगुलर क्लासेज के जैसा नहीं हाे सकता।

  •  स्कूल के क्लास रूम में पढ़ाई का जाे माहाैल हाेता है वह घर पर रह कर अाॅनलाइन संभव नहीं।